आधुनिक दुनियाँ (Modern World)🎃🏙️
- Aug 10, 2022
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Updated: Aug 21, 2022
In the name of progress we have succumbed to the very evil we wish to fight. A few lines in Hindi, that depict an earful delivered to the pompous modern human, to highlight the contradiction we have created. 🎭

“ रंगीन तेरे चश्मे न्यारे, पर तुझे टुकड़े बस नजर आ रहे |
एकरूप है सब उसमे ऐसी उसकी रचना, विरोधाभास है समरूपता का तेरा बचपना |
जिस आज का तुझे प्रचण्ड अभिमान, अनंत बलिदानों से अर्जित वह ये जान |
विज्ञान और तर्क जैसे उपकरणों का तुझे गुमान, पर दिशाहीन है तू नकार के धर्मोर्जित मूल्यों का वरदान |
अंधविश्वास से त्रिकाल हैं तेरे शब्द और कृति निष्प्राण, बदल रहा केवल तेरे श्रद्धा का स्थान |
विवेक, धीरज, और आदर की आहुति दे रहा तू बेभान , रोप रहा ज़मीनो में हवस यह अब जान |
वाह रे तेरी नई ये दूनिया इंसान, नतमस्तक हैं स्वयं शैतान | ”



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